Last updated: June 26th, 2026 at 06:06 am
limate Change Increases Himalayan Disaster Threatमंडी: हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से बाढ़, भूकंप और हिमनदी से जुड़ी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता पहले की तुलना में अधिक हो गई है। इस गंभीर विषय पर आईआईटी मंडी में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने विस्तृत चर्चा की।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि अब केवल आपदा आने के बाद राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय, वैज्ञानिक शोध और तकनीक के आधार पर दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है। शोध से प्राप्त निष्कर्षों को नीतियों और जमीनी स्तर पर लागू करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
सम्मेलन में जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर जे. डेविड फ्रॉस्ट, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (मर्सिड) के प्रोफेसर सफीक खान, इंपीरियल कॉलेज लंदन, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी, विभिन्न आईआईटी, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र तथा अन्य केंद्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए।
इस सम्मेलन को राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF), टाटा ट्रस्ट्स और केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का सहयोग प्राप्त हुआ। वहीं, मैकाफेरी टेक्निकल और स्प्रिंगर नेचर प्रकाशन सहयोगी के रूप में जुड़े रहे।
तकनीकी सत्रों में बहु-आपदा जोखिम आकलन, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, हिमनदी एवं जल संसाधनों से जुड़े जोखिम, भूकंपरोधी अवसंरचना, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग के माध्यम से आपदा पूर्वानुमान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को मजबूत करने और आधुनिक तकनीक के अधिक उपयोग पर भी जोर दिया।
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.
No Comments