HomeAll Newsनई पहल: एफआरए के तहत 600 से अधिक सड़कों को मिलेगी मंजूरी, सरकार के बचेंगे 100 करोड़ तक

नई पहल: एफआरए के तहत 600 से अधिक सड़कों को मिलेगी मंजूरी, सरकार के बचेंगे 100 करोड़ तक

प्रदेश में वन भूमि पर बनी 600 से अधिक सड़कों को अब वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत मंजूरी मिलने
news mitr600+ Roads Cleared Under FRA

प्रदेश में वन भूमि पर बनी 600 से अधिक सड़कों को अब वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार द्वारा बिना वन स्वीकृति (एफसीए) के निर्मित 2183 सड़कों की जांच के आदेश दिए गए थे, जिसके बाद यह सामने आया कि इनमें से 600 से अधिक सड़कें एफआरए के प्रावधानों के अनुरूप हैं और उन्हें इस अधिनियम के तहत स्वीकृति दी जा सकती है।

Table of Contents

    जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ सड़कें ऐसी हैं, जिनके लिए पहले से वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के तहत मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। ऐसी 117 सड़कों के मामलों में अब लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को पहले एफसीए के आवेदन वापस लेने होंगे और फिर एफआरए के तहत नई प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

    सरकारी अधिकारियों के अनुसार, एफआरए के तहत मंजूरी मिलने वाली अधिकांश सड़कों का निर्माण एक हेक्टेयर या उससे कम वन भूमि पर हुआ है, जिससे वे इस अधिनियम की पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं।

    सरकार के इस कदम से राज्य को आर्थिक लाभ भी मिलेगा। एफसीए के तहत स्वीकृति के लिए नेट प्रेजेंट वैल्यू (एनपीवी) सहित कई वित्तीय और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। वहीं, एफआरए के तहत एनपीवी जमा कराने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे राज्य सरकार के लगभग 80 से 100 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।

    उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने बिना वन स्वीकृति के बनी 2183 सड़कों की जांच और नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। संबंधित विभाग यह तय कर रहे हैं कि कौन-कौन सी सड़कें एफआरए की सभी शर्तों को पूरा करती हैं, ताकि उन्हें नियमानुसार मंजूरी देकर आगे की कार्रवाई की जा सके।

    इन 2183 सड़कों में सबसे अधिक 821 सड़कें मंडी जोन की हैं। इसके अलावा शिमला जोन की 613, कांगड़ा जोन की 495 और हमीरपुर जोन की 254 सड़कें जांच के दायरे में शामिल हैं। सभी संबंधित विभागों द्वारा विस्तृत जांच के बाद पात्र सड़कों को एफआरए के तहत स्वीकृति प्रदान की जाएगी।

    No Comments

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.

    TOP NEWS

    Latest

    More
    More
    Copyright 2026 Site. All rights reserved powered by site.com