Last updated: October 13th, 2026 at 05:29 am
IGMC Shimla Lab Crisis: Several Key Tests Suspendedशिमला: इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला की सरकारी लैब में कई महत्वपूर्ण जांचें बंद होने से मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रीजेंट्स की कमी और पुरानी मशीनों में बार-बार खराबी आने के कारण जांच व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हैरानी की बात यह है कि कर्मचारी उपलब्ध होने के बावजूद संसाधनों के अभाव में जांच कार्य नहीं हो पा रहा है।
जानकारी के अनुसार, लैब में थायराइड, एचबीए1सी, इलेक्ट्रोलाइट्स, सीआरपी, एएसओ, वीडीआरएल और एएनए समेत कई महत्वपूर्ण टेस्ट नहीं हो रहे हैं। इनमें से कुछ जांचें पिछले दो से तीन वर्षों से बंद बताई जा रही हैं। ऐसे में मरीजों को निजी लैब में जांच करवानी पड़ रही है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
13-14 साल पुरानी मशीन के सहारे बायोकेमिस्ट्री लैब
अस्पताल की बायोकेमिस्ट्री लैब में इस्तेमाल हो रही मशीन करीब 13 से 14 साल पुरानी है, जबकि इसकी निर्धारित कार्य अवधि लगभग सात साल बताई गई है। पुरानी मशीन में बार-बार खराबी आने से जांच प्रक्रिया बाधित होती है और मरीजों को रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ता है।
इमरजेंसी लैब भी लंबे समय से बंद
IGMC की इमरजेंसी लैब बंद होने से आपातकालीन मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने लैब के संचालन के लिए इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन विभाग को 10 कर्मचारियों की आवश्यकता संबंधी मांग भेजी थी, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।
मरीजों के लिए समय पर जांच रिपोर्ट बेहद जरूरी होती है, खासकर आपातकालीन परिस्थितियों में। ऐसे में जांच सेवाओं को बहाल करने के लिए मशीनों की मरम्मत, नई मशीनों की उपलब्धता और रीजेंट्स की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है। जांच सुविधाएं लंबे समय से प्रभावित होने के कारण मरीजों के साथ-साथ अस्पताल के संसाधनों का उपयोग भी प्रभावित हो रहा है।
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