Last updated: October 19th, 2026 at 05:37 am
Himachal News: Cancer Medicines to Become Cheaper, 137 Drugs Covered Under New Rulesहिमाचल प्रदेश: कैंसर के महंगे इलाज से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत की खबर है। राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसररोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन की अधिकतम सीमा 30 प्रतिशत तय कर दी है। इस फैसले से निर्धारित सीमा से अधिक मार्जिन पर बेची जा रही संबंधित दवाओं की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। नई दरें 9 नवंबर, 2026 से देशभर में लागू होंगी।
प्राधिकरण ने 17 अक्टूबर को जारी आदेश में कहा कि कैंसर के उपचार पर होने वाला भारी खर्च मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रहा है। बाजार के आंकड़ों के विश्लेषण में कुछ कैंसररोधी दवाओं पर अत्यधिक व्यापार मार्जिन पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। इसके लिए औषध मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के पैरा 19 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल किया गया है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अंतर्गत गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर 137 कैंसररोधी दवाओं को इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। इनमें बेवासिजुमैब, डेनोसुमैब, पेगफिलग्रास्टिम, पेम्ब्रोलिजुमैब, डुरवालुमैब और ओसिमर्टिनिब जैसी दवाएं शामिल हैं। यह नियम संबंधित दवाओं की अलग-अलग ताकत और खुराक रूपों वाले गैर-अनुसूचित फॉर्मूलेशन पर लागू होगा।
नए नियम के तहत दवाओं का व्यापार मार्जिन जीएसटी को छोड़कर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगा। आदेश में दिए गए उदाहरण के अनुसार, यदि किसी दवा का स्टॉकिस्ट या वितरक मूल्य 70 रुपये है, तो उसकी अधिकतम अनुमेय खुदरा कीमत 100 रुपये और लागू जीएसटी होगी।
हालांकि, सभी 137 दवाओं की कीमतों में एक समान कटौती नहीं होगी। कीमत कितनी घटेगी, यह उसकी मौजूदा एमआरपी और निर्धारित गणना के आधार पर तय होगा।
NPPA ने दवा निर्माताओं, वितरकों, दवा विक्रेताओं और अस्पतालों को संशोधित कीमतों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। राज्य औषध नियंत्रक इस व्यवस्था की निगरानी करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि मरीजों से निर्धारित सीमा से अधिक कीमत न वसूली जाए।
यदि कोई कंपनी या विक्रेता तय सीमा से अधिक कीमत वसूलता है, तो अतिरिक्त राशि की ब्याज सहित वसूली की जा सकती है। इसके अलावा, कंपनियों को संशोधित कीमतों की जानकारी उपभोक्ताओं तक पहुंचाने और नियमों के अनुपालन से संबंधित विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस फैसले का उद्देश्य कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली संबंधित दवाओं पर अनावश्यक व्यापार मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
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