Last updated: November 2nd, 2026 at 06:48 am
Himachal High Court Quashes Rules on Pending Salary & Pension Arrearsशिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार को बड़ा झटका देते हुए सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के संशोधित वेतन व पेंशन बकाये का भुगतान टालने और किश्तों में करने से जुड़े कई प्रावधान रद्द कर दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संकट का हवाला देकर कर्मचारियों और पेंशनरों के कानूनी मौद्रिक अधिकारों को अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता।
31 अक्टूबर को जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाया। अदालत ने संशोधित वेतन नियम, 2022 के नियम 13 सहित उन प्रावधानों को अमान्य कर दिया, जिनके तहत सरकार को वेतन, पेंशन, पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी, कम्यूटेड पेंशन और लीव एनकैशमेंट के बकाये के भुगतान का समय और तरीका तय करने का व्यापक अधिकार दिया गया था।
दो किश्तों में भुगतान के निर्देश
हाईकोर्ट ने मुख्य याचिकाकर्ता को पूरा बकाया दो बराबर किश्तों में जारी करने के निर्देश दिए हैं। पहली किश्त 15 दिसंबर 2026 और दूसरी किश्त 28 फरवरी 2027 तक देनी होगी। इसके साथ ही 1 जून 2022 से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी आदेश दिया गया है।
अन्य कर्मचारियों और पेंशनरों को भी राहत
अदालत ने स्पष्ट किया कि 30 अक्टूबर 2026 तक याचिका दायर नहीं करने वाले कर्मचारी और पेंशनभोगी भी अपने वास्तविक मौद्रिक लाभ पाने के हकदार रहेंगे। हालांकि, उन्हें इस फैसले के याचिकाकर्ताओं को मिलने वाला 6 प्रतिशत ब्याज नहीं मिलेगा।
वित्तीय संकट का तर्क नहीं माना
राज्य सरकार ने राजस्व घाटा अनुदान बंद होने और वित्तीय संकट का हवाला देते हुए किश्तों में भुगतान के फैसले का बचाव किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एक बार कानूनी नियमों के तहत कर्मचारियों और पेंशनरों का मौद्रिक अधिकार तय हो जाने के बाद सरकार मनमाने प्रशासनिक आदेशों से उनका भुगतान नहीं रोक सकती।
अदालत ने यह भी माना कि ऐसे मौद्रिक अधिकारों को संविधान के अनुच्छेद 300-A के तहत संरक्षण प्राप्त है। इस फैसले से प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया भुगतान को लेकर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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