Last updated: July 7th, 2026 at 06:42 am
Fatty Liver Cases Rising in Indiaनई दिल्ली। भारत में फैटी लिवर और टाइप-2 डायबिटीज जैसी मेटाबोलिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। चिंता की बात यह है कि जो रोग पहले मुख्य रूप से मध्यम आयु और बुजुर्गों तक सीमित माने जाते थे, अब वे युवाओं, किशोरों और बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रहे हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) में लिवर एंड मेटाबोलिक डिजीज नेटवर्क (INFLAMEN) की तीसरी वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारत में फैटी लिवर, टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, डिस्लिपिडेमिया और इंसुलिन प्रतिरोध जैसी बीमारियां एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं और तेजी से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, अस्वास्थ्यकर खान-पान, बढ़ता मोटापा, अनियमित नींद, तनाव और पर्यावरण प्रदूषण इन बीमारियों के प्रमुख कारण हैं। भारत की आनुवंशिक बनावट भी लोगों को मधुमेह, फैटी लिवर और हृदय रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।
डॉ. सिंह ने कहा कि अब केवल इलाज पर ध्यान देने के बजाय रोकथाम, समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार को प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने आईएलबीएस द्वारा राष्ट्रीय लिवर बायोबैंक बनाने की पहल की सराहना करते हुए शुरुआती चरण में लिवर रोग की पहचान करने वाली किफायती तकनीकों, सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग और स्वदेशी बायोमार्कर विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि भारत का तेजी से विकसित हो रहा जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र, जीनोम मिशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शोध भविष्य में सटीक (Precision) चिकित्सा का मार्ग प्रशस्त करेंगे, जिससे मरीजों को उनकी आनुवंशिक प्रोफाइल, जीवनशैली और जोखिम कारकों के अनुसार बेहतर उपचार मिल सकेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वस्थ आबादी सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए फैटी लिवर और डायबिटीज जैसी बीमारियों पर समय रहते नियंत्रण करना देश की युवा शक्ति, उत्पादकता और भविष्य की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद आवश्यक है।
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