HomeAll Newsबीबीएन में लंपी को लेकर पशुपालन विभाग अलर्ट, 7,500 गोवंश का हुआ टीकाकरण

बीबीएन में लंपी को लेकर पशुपालन विभाग अलर्ट, 7,500 गोवंश का हुआ टीकाकरण

बीबीएन के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ में करीब 20 गोवंश में लंपी स्किन डिजीज जैसे लक्षण मिलने के
news -mitrLumpy Virus Alert in BBN, 7,500 Cattle Vaccinated

बीबीएन के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ में करीब 20 गोवंश में लंपी स्किन डिजीज जैसे लक्षण मिलने के बाद पशुपालन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। बीमारी के संभावित प्रसार को रोकने के लिए विभाग ने टीकाकरण अभियान तेज करते हुए घर-द्वार जाकर गोवंश का टीकाकरण शुरू कर दिया है।

बीबीएन क्षेत्र में करीब 20 हजार गोवंश हैं, जिनमें से अब तक लगभग 7,500 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी नालागढ़ डॉ. संजीव त्यागी ने बताया कि फिलहाल करीब 20 पशुओं में लंपी जैसे लक्षण पाए गए हैं। विभागीय टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और पशुपालकों को आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गोवंश को प्रभावित करती है। इसका संक्रमण मक्खी, मच्छर और किलनी जैसे खून चूसने वाले कीटों के माध्यम से फैल सकता है। संक्रमित पशुओं की आवाजाही से भी बीमारी के दूसरे क्षेत्रों में पहुंचने का खतरा रहता है।

संक्रमित पशुओं को अलग रखने की सलाह

डॉ. संजीव त्यागी ने पशुपालकों से अपील की है कि जिन पशुओं में लंपी के लक्षण दिखाई दें, उन्हें तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें। संक्रमित पशुओं के लिए चारा और पानी की व्यवस्था भी अलग रखी जाए। पशुशालाओं की नियमित सफाई करने के साथ-साथ आसपास पानी जमा न होने दें, ताकि संक्रमण फैलाने वाले कीटों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि पशुओं को मक्खी, मच्छर और किलनी से बचाने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार उचित उपाय किए जाएं। पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। किसी भी पशु में लंपी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय को सूचना देने की अपील की गई है।

लंपी बीमारी के प्रमुख लक्षण

लंपी से प्रभावित पशुओं में बुखार, शरीर पर गांठें या उभार, आंख और नाक से पानी आना, भूख कम होना, सुस्ती, पैरों या शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

ऐसे लक्षण नजर आने पर पशुपालकों को पशु को अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग कर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। विभाग ने पशुपालकों से घर-द्वार चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान में सहयोग करने की भी अपील की है।

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