Last updated: June 4th, 2026 at 10:10 am
BJP Leaders Eye Solan Mayor Postसोलन नगर निगम के मेयर पद को अनारक्षित (ओपन) श्रेणी में रखने संबंधी प्रदेश सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मेयर पद पर कब्जा जमाने के लिए संभावित दावेदारों ने अपनी-अपनी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। नगर निगम के 17 वार्डों में भाजपा के 10, कांग्रेस के 5 और दो निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में संख्याबल के आधार पर भाजपा का मेयर और डिप्टी मेयर पद पर दावा मजबूत माना जा रहा है।
प्रदेश सरकार ने सोलन, धर्मशाला, मंडी और पालमपुर नगर निगमों के महापौर पदों को ओपन श्रेणी में रखने की अधिसूचना जारी की है। इसके बाद मेयर पद की दौड़ में शामिल संभावित उम्मीदवार सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार कई पार्षदों ने शिमला में पार्टी नेतृत्व से संपर्क साधना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ दावेदार केंद्रीय स्तर पर भी समर्थन जुटाने में लगे हैं।
भाजपा के भीतर मेयर पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें वार्ड नंबर 2 से लगातार चौथी बार निर्वाचित पार्षद सुषमा शर्मा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। उन्हें नगर निगम के कार्यों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का लंबा अनुभव है। इसके अलावा वार्ड नंबर 15 से पहली बार पार्षद बने अभिषेक ठाकुर भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। उनके पिता देवेंद्र ठाकुर नगर परिषद सोलन के अध्यक्ष रह चुके हैं और अभिषेक पार्टी संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
वार्ड नंबर 12 की पार्षद प्रियंका अग्रवाल का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। वह पूर्व में भाजपा की मनोनीत पार्षद रह चुकी हैं और हालिया चुनाव में तत्कालीन मेयर उषा शर्मा को पराजित कर चर्चा में आई थीं। वहीं वार्ड नंबर 6 की पार्षद रेखा साहनी और वार्ड नंबर 1 की पार्षद नीलम भी अपनी दावेदारी पेश कर सकती हैं। नीलम के परिवार का भाजपा के साथ निकट संबंध माना जाता है, जिससे उनकी संभावनाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नगर निगम में कई प्रभावशाली चेहरे जीतकर आए हैं, इसलिए मेयर और डिप्टी मेयर के चयन को लेकर भाजपा नेतृत्व को संतुलन साधने में काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
इस बार मेयर पद के कार्यकाल में भी बड़ा बदलाव किया गया है। नई अधिसूचना के अनुसार मेयर का कार्यकाल अब पूरे पांच वर्ष का होगा। इससे पहले नगर निगम में मेयर पद के लिए ढाई-ढाई वर्ष का कार्यकाल निर्धारित किया जाता था।
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