Last updated: August 29th, 2026 at 06:21 am
Himachal Faces Growing Glacial Lake Threatशिमला: नेपाल में हालिया प्राकृतिक आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश में भी ग्लेशियल झीलों से जुड़े संभावित खतरे को लेकर चिंता बढ़ गई है। विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य में तेजी से बढ़ रही ग्लेशियल झीलों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा हुई। रिपोर्टों के अनुसार, हिमाचल में जोखिम वाली ग्लेशियल झीलों की संख्या 2019 में 562 से बढ़कर अब 1,000 से अधिक हो गई है।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, देश में चिन्हित उच्च जोखिम वाली 48 संवेदनशील ग्लेशियल झीलों में से बड़ी संख्या हिमाचल प्रदेश में है। हिमकोस्टा, इसरो और एनडीएमए के उपग्रह अध्ययनों में राज्य के विभिन्न नदी बेसिनों में ग्लेशियल झीलों के तेजी से विस्तार की बात सामने आई है।
सतलुज बेसिन में 750 से अधिक झीलें किन्नौर और स्पीति सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बताई गई हैं। वहीं, चिनाब बेसिन में 250 से अधिक, ब्यास बेसिन में 90 से अधिक और रावी बेसिन में 60 से अधिक ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नेपाल की घटना को हिमालयी क्षेत्र में गहराते जलवायु संकट का संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण सतलुज, ब्यास, रावी और चिनाब बेसिन के ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं। इससे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
सरकार संभावित जोखिमों को देखते हुए ग्लेशियर विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के साथ स्थिति की समीक्षा कर रही है, ताकि समय रहते जरूरी सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें।
नेपाल की हालिया प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में बदलते मौसम के स्वरूप और बढ़ते प्राकृतिक जोखिमों पर सवाल खड़े किए हैं। हिमाचल भी वर्ष 2023-24 में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन जैसी गंभीर आपदाओं का सामना कर चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव आने वाले समय में हिमाचल समेत पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में ग्लेशियल झीलों की लगातार निगरानी, समय पर चेतावनी और मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था बेहद जरूरी हो गई है।
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