Solan Hospital Oxygen Plant Restartsसोलन। करीब तीन महीने तक बंद रहने के बाद क्षेत्रीय अस्पताल सोलन का पीएसए (प्रेशर स्विंग एडसॉर्प्शन) ऑक्सीजन प्लांट दोबारा शुरू हो गया है। प्लांट के संचालन से अस्पताल एक बार फिर मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया है, जिससे मरीजों और अस्पताल प्रशासन को बड़ी राहत मिली है।
प्रदेश सरकार ने प्लांट के संचालन के लिए तैनात कर्मियों और तकनीशियनों का अनुबंध 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है। इसी के बाद प्लांट को दोबारा चालू किया गया। प्लांट बंद रहने के दौरान अस्पताल को बाहरी एजेंसियों से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाने पड़ रहे थे। हालांकि इस अवधि में मरीजों को ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी गई, लेकिन अस्पताल को अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ा।
अब स्थानीय स्तर पर ऑक्सीजन उत्पादन शुरू होने से आपातकालीन परिस्थितियों में भी मरीजों को समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध कराना आसान होगा।
क्षेत्रीय अस्पताल का पीएसए ऑक्सीजन प्लांट प्रति मिनट 1,000 लीटर ऑक्सीजन तैयार करने की क्षमता रखता है। यह लगभग 200 बेड से सीधे जुड़ा हुआ है, जिससे सभी वार्डों में बिना किसी बाधा के ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा सकती है। गंभीर मरीजों के उपचार में यह सुविधा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यह अत्याधुनिक पीएसए ऑक्सीजन प्लांट वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया गया था। इस बार प्लांट किसी तकनीकी खराबी के कारण नहीं, बल्कि संचालन कर्मियों का अनुबंध समाप्त होने के कारण बंद हुआ था।
क्षेत्रीय अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश पवार ने बताया कि सरकार द्वारा संचालन कर्मियों का अनुबंध 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है। इससे अस्पताल में ऑक्सीजन उत्पादन लगातार जारी रहेगा और मरीजों को निर्बाध सुविधा मिलती रहेगी।
इस बीच क्षेत्र के लोगों ने चंडी अस्पताल में भी पीएसए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने की मांग उठाई है, ताकि वहां भी मरीजों को ऐसी ही आधुनिक सुविधा उपलब्ध हो सके।
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