Three Students Die by Suicide Ahead of NEET 2026नई दिल्ली/गाजियाबाद/चेन्नई: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 से ठीक पहले देश के अलग-अलग राज्यों से तीन छात्रों की आत्महत्या की दुखद घटनाएं सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक अभ्यर्थी ने फांसी लगाकर जान दे दी, जबकि तमिलनाडु में दो छात्राओं ने परीक्षा में असफल होने के डर और मानसिक तनाव के चलते आत्मघाती कदम उठा लिया।
गाजियाबाद में 22 वर्षीय छात्र लंबे समय से नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा था। कई प्रयासों के बावजूद सफलता न मिलने से वह गहरे मानसिक तनाव में था। आत्महत्या से पहले उसने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने लगातार असफलता और भविष्य को लेकर अपनी निराशा व्यक्त की।

वहीं, तमिलनाडु के सेलम जिले के वेल्लालपुरम क्षेत्र में 12वीं की छात्रा गोपिका ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह पिछले वर्ष नीट परीक्षा में शामिल हुई थी, लेकिन अपेक्षित अंक नहीं मिलने के कारण मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं पा सकी थी। इस वर्ष दोबारा परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा को फिर से असफल होने का भय सताने लगा, जिसके चलते उसने यह दुखद कदम उठा लिया।
कोयम्बटूर की छात्रा अनुकीर्तना ने भी परीक्षा के दबाव और भविष्य की चिंता के बीच जहर खाकर आत्महत्या कर ली। दो दिनों के भीतर दो छात्राओं की मौत ने पूरे राज्य में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
इन घटनाओं के बाद तमिलनाडु में एक बार फिर नीट परीक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं ने राज्य को नीट से छूट देने तथा 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश की व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई है।
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पहले भी केंद्र सरकार से राज्य को नीट परीक्षा से छूट देने का आग्रह कर चुके हैं। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था छात्रों पर अत्यधिक मानसिक दबाव डाल रही है।
पट्टाली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद डॉ. अंबुमणि रामदास ने इन घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रों की लगातार हो रही आत्महत्याओं को रोकने के लिए नीट परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव और सफलता को लेकर सामाजिक अपेक्षाएं कई छात्रों को मानसिक रूप से प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में अभिभावकों, शिक्षकों और संस्थानों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक सहयोग पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
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