Last updated: June 13th, 2026 at 10:14 am
Sex Ratio Hits 929केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और जागरूकता अभियानों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश में जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) वर्ष 2014-15 के 918 से बढ़कर 2024-25 में 929 हो गया है। यह सुधार बालिकाओं के संरक्षण, शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए चलाए गए प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।
सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ (बीबीबीपी) योजना ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 22 जनवरी 2015 को शुरू की गई यह योजना घटते बाल लिंगानुपात और लैंगिक भेदभाव जैसी चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त पहल के रूप में संचालित इस योजना ने पिछले 11 वर्षों में जन-आंदोलन का रूप ले लिया है।
योजना के तहत बालिकाओं के जन्म, सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही भेदभावपूर्ण लिंग चयन को रोकने और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए गए, जिनका सकारात्मक प्रभाव आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। शिक्षा मंत्रालय के एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन वर्ष 2014-15 में 75.51 प्रतिशत था, जो बढ़कर 2024-25 में 80.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह बालिकाओं की शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और स्कूलों तक उनकी बेहतर पहुंच को दर्शाता है।
सरकार का कहना है कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बालिकाओं के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण तैयार करने का व्यापक अभियान है। निरंतर जनसहभागिता, जागरूकता कार्यक्रमों और विभिन्न मंत्रालयों तथा राज्यों के समन्वित प्रयासों से बालिकाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बालिकाओं के संरक्षण, शिक्षा और सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि प्रत्येक बेटी को समान अवसर उपलब्ध कराना महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.
No Comments