HomeAll Newsएचपीयू में नियुक्तियों को लेकर विवाद गहराया, एसएफआई ने रजिस्ट्रार का किया घेराव

एचपीयू में नियुक्तियों को लेकर विवाद गहराया, एसएफआई ने रजिस्ट्रार का किया घेराव

शिमला: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में नियुक्तियों, पदोन्नतियों और यूजीसी-सीएएस के तहत दिए गए वित्तीय लाभों में कथित अनियमितताओं को
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शिमला: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में नियुक्तियों, पदोन्नतियों और यूजीसी-सीएएस के तहत दिए गए वित्तीय लाभों में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इन मुद्दों पर कार्रवाई की मांग करते हुए स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की एचपीयू इकाई ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार का घेराव किया।

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    एसएफआई ने बताया कि संगठन द्वारा पिछले एक महीने में विश्वविद्यालय प्रशासन को पांच अलग-अलग ज्ञापन सौंपे गए थे, जिनमें विभिन्न नियुक्तियों और पदोन्नतियों में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई थी। संगठन का आरोप है कि ज्ञापनों के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

    एसएफआई के अनुसार, डिपार्टमेंट ऑफ लाइफ लॉन्ग लर्निंग में असिस्टेंट प्रोफेसर (अर्थशास्त्र) की नियुक्ति के दौरान यूजीसी नियमों के विपरीत पात्रता शर्तों में बदलाव किया गया। संगठन का दावा है कि बिना सक्षम वैधानिक मंजूरी के पांच वर्ष के शोध अनुभव को अनिवार्य बनाकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया गया और एक विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।

    इसके अलावा, इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल स्टडीज में प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति को लेकर भी एसएफआई ने सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि संबंधित उम्मीदवार ने यूजीसी द्वारा निर्धारित न्यूनतम सेवा अवधि पूरी नहीं की थी, इसके बावजूद उसे प्रोफेसर नियुक्त किया गया। एसएफआई ने विश्वविद्यालय पर समान प्रकार की सेवाओं की अलग-अलग व्याख्या कर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया है।

    संगठन ने इन मामलों की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने, तत्कालीन रजिस्ट्रार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की है। साथ ही, जांच पूरी होने तक संबंधित मामलों में दिए गए वित्तीय और प्रशासनिक लाभों को रोकने की भी मांग की गई है।

    एसएफआई ने वर्ष 2010 और 2018 के बाद यूजीसी-सीएएस के तहत हुई सभी नियुक्तियों और पदोन्नतियों की न्यायिक या एसआईटी जांच कराने, कथित रूप से अवैध वित्तीय लाभों की वसूली करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई है।

    एसएफआई के परिसर सचिव मुकेश ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता है तो संगठन छात्रों को साथ लेकर व्यापक आंदोलन शुरू करेगा।

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