HomeAll Newsहिमाचल की धरोहर को दुनिया तक पहुंचाएंगे पर्यटन गाइड, धर्मशाला में हेरिटेज प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू

हिमाचल की धरोहर को दुनिया तक पहुंचाएंगे पर्यटन गाइड, धर्मशाला में हेरिटेज प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू

धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से धर्मशाला में हेरिटेज एवं पर्यटन
news mitrTourism Guides to Promote Himachal’s Heritage, 7-Day Workshop Begins in Dharamshala

धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से धर्मशाला में हेरिटेज एवं पर्यटन गाइडों के लिए सात दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) धर्मशाला चैप्टर द्वारा पर्यटन विभाग और राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के सहयोग से आयोजित की जा रही है।

20 से 26 जून तक चलने वाली इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्थानीय पर्यटन गाइडों को जिम्मेदार पर्यटन, विरासत संरक्षण और पेशेवर कौशल के बारे में प्रशिक्षित करना है, ताकि वे हिमाचल की समृद्ध संस्कृति और धरोहर के बेहतर प्रतिनिधि बन सकें।

कार्यक्रम में INTACH की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मालविका पठानिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर INTACH धर्मशाला चैप्टर के कन्वीनर डॉ. नरेंद्र अवस्थी, राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया, पर्यटन एवं विरासत विशेषज्ञ प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

विरासत संरक्षण में गाइडों की भूमिका अहम

डॉ. नरेंद्र अवस्थी ने प्रतिभागियों को INTACH की स्थापना, उद्देश्यों और देशभर में किए जा रहे विरासत संरक्षण कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1984 में स्थापित INTACH भारत की सांस्कृतिक, प्राकृतिक और वास्तुकला धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रहा है।

मुख्य अतिथि मालविका पठानिया ने कहा कि हिमाचल की संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने में प्रशिक्षित पर्यटन गाइडों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गाइड केवल जानकारी देने वाला व्यक्ति नहीं बल्कि प्रदेश की संस्कृति का प्रतिनिधि होता है।

प्रशिक्षण में सॉफ्ट स्किल्स पर भी जोर

प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ने कहा कि एक सफल पर्यटन गाइड के लिए केवल इतिहास और संस्कृति का ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि संवाद क्षमता, व्यवहार कुशलता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता भी जरूरी है।

उन्होंने बताया कि बेहतर प्रशिक्षित गाइड पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ किसी पर्यटन स्थल की सकारात्मक छवि बनाने में मदद करते हैं।

युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर

प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल प्रदान करने के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूक बनाती हैं।

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